एक रूट से कहीं ज़्यादा।
विरासत को बस ढोना नहीं, उसे आगे ले जाना।
रूट दो बिंदुओं के बीच खिंची एक लकीर भर नहीं होता। कभी वह एक बंदरगाह से दूसरे तक जाता है, कभी किसी कंटेनर के पीछे-पीछे महाद्वीप पार करता है। मेरा रूट तब शुरू हुआ, जब परिवार का बरसों में जुटाया अनुभव नई पीढ़ी में नया रूप लेने लगा।
लॉजिस्टिक्स मेरी ज़िंदगी में बाद में आया कोई सेक्टर नहीं है। बचपन से ही मेरे चारों ओर कारोबार की बातें होती थीं और फोन लगातार बजते रहते थे। लोडिंग, बंदरगाह, डिलीवरी की वे तारीखें जिनसे चूकना नहीं था, और वे समस्याएँ जिन्हें उसी दिन सुलझाना था: मेरा बचपन इन्हीं के बीच बीता।
एक तरफ़ मेरे परिवार का वह अनुभव था, जो मैदान में, काम के ठीक बीचोंबीच कमाया गया था; दूसरी तरफ़ एक ऐसी दुनिया, जो लगातार बदलती रहती है। इस काम को देखने का मेरा नज़रिया इन दोनों के बीच बना।
यह लेख पहले तुर्की भाषा में LinkedIn पर प्रकाशित हुआ था।